सोचते हैं अक्सर तन्हाई में रहके
क्या मिला हमें परछाई में रहके
मोहब्बत करके भी हासिल कुछ न था
बस तड़पा किये रुसवाई में रहके
क्या मिला हमें परछाई में रहके
तसव्वुर में उसके जलती रही ये आँखे
यादो में उसके रोती रही ये सांसे
और एक वो है जिसे इल्म तक नहीं के
लुट गए हैं हम उसकी बेवफाई में रहके
आखिर क्या मिला हमें परछाई में रहके
हर लम्हा कहर ऐसा ढाता है
जली हो जैसे लौ दीपक की जुदाई में रहके
न जाने क्या मिला हमें परछाई में रहके
क्या मिला हमें परछाई में रहके
मोहब्बत करके भी हासिल कुछ न था
बस तड़पा किये रुसवाई में रहके
क्या मिला हमें परछाई में रहके
तसव्वुर में उसके जलती रही ये आँखे
यादो में उसके रोती रही ये सांसे
और एक वो है जिसे इल्म तक नहीं के
लुट गए हैं हम उसकी बेवफाई में रहके
आखिर क्या मिला हमें परछाई में रहके
हर लम्हा कहर ऐसा ढाता है
जली हो जैसे लौ दीपक की जुदाई में रहके
न जाने क्या मिला हमें परछाई में रहके