Friday, 21 June 2013

आज जी भर के रुलादो

आज जी भर के रुलादो यारो
मेरे नादाँ दिल को समझा दो यारो
बेजान नज़रे नजाने कबसे पत्थर है
आज तोह जी भर के रुलादो यारो

दिल का दर्द कभी चेहरे से बयां न किया
हर किसी के आगे हमेशा बस मुस्कुरा दिया
रोना चाहा दिल ने हनेशा
पर हमने दिल को समझा दिया
पर आज यर झूटी हंसी मिटादो यारो
और आज जी भर के रुलादो यारो

एक अरसा हमने खुद को पत्थर बनाया
अपने अश्को को हमेशा छुपाया
बरसना चाहा पलकों ने
जिद्द से भी हम इसे हँसाया
आज आँखों की ख़ामोशी मिटा दो यारो
और आज जी भर के रुलादो यारो.....